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Amarinder Singh Biography in Hindi
November 8, 2019 • Damodar Singh

कैप्‍टन अमरिंदर सिंह पंजाब विधानसभा के सदस्‍य हैं और पंजाब के पूर्व मुख्‍यमंत्री हैं। उनका जन्‍म 11 मार्च 1942 को पटियाला में हुआ था।
26 फरवरी 2002 से 1 मार्च 2007 तक वे पंजाब के मुख्‍यमंत्री रहे। कैप्‍टन अमरिंदर सिंह कांग्रेस पार्टी के सदस्‍य हैं। कैप्‍टन सिंह पटियाला के महाराज यादविंदर सिंह के पुत्र हैं, उनकी माता का नाम मोहिंदर कौर था।

उनका विवाह परनीत कौर से हुआ। परनीत कौर भी राजनीति में सक्रिय हैं तथा मनमोहन सिंह की सरकार में वे भारत की विदेश राज्य मंत्री रह चुकी हैं। 2014 के लोकसभा चुनावों में उन्होंने पटियाला सीट से चुनाव लड़ा किंतु उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
1980 में उन्‍होंने कांग्रेस प्रत्‍याशी के रूप में लोकसभा चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। 1984 में उन्‍होंने कांग्रेस से इस्‍तीफ़ा दे दिया और अकाली दल में शामिल हो गए। अकाली दल के प्रत्‍याशी के रुप में राज्‍यसभा का चुनाव जीतने के बाद वेराज्‍य के कृषि और वन मंत्री भी रहे।

आगे चलकर उन्‍होंने एक नए दल शिरोमणि अकाली दल (पंथिक) की स्‍थापना की। बाद में इस दल कांग्रेस का समर्थन किया और कैप्‍टन सिंह पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्‍यक्ष घोषित किए गए। वह 1999 से 2002 तक कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्‍यक्ष रहे और 2002 से 2007 तक पंजाब के मुख्‍यमंत्री रहे।
आगे चलकर उन्‍होंने एक नए दल शिरोमणि अकाली दल (पंथिक) की स्‍थापना की। बाद में इस दल कांग्रेस का समर्थन किया और कैप्‍टन सिंह पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्‍यक्ष घोषित किए गए। वह 1999 से 2002 तक कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्‍यक्ष रहे और 2002 से 2007 तक पंजाब के मुख्‍यमंत्री रहे।

उन्हें 1963 में भारतीय सेना में शामिल किया गया और दूसरी बटालियन सिख रेजीमेंट में तैनात किया गया। इसी रेजीमेंट में उनके पिता एवं दादा ने सेवाएं दी थी। अमरिंदर ने फील्ड एरिया- भारत तिब्बत सीमा पर दो साल तक सेवाएं दी और उन्हें पश्चिमी कमान के जीओसी इन सी लेफ्टिनेंट जनरल हरबक्श सिंह का ऐड डि कैम्प नियुक्त किया गया था।

सेना में उनका कैरियर छोटा रहा। उन्होंने उनके पिता को इटली का राजदूत नियुक्त किए जाने के बाद 1965 की शुरुआत में इस्तीफा दे दिया था क्योंकि घर पर उनकी आवश्यकता थी लेकिन वह पाकिस्तान के साथ युद्ध छिड़ने के तत्काल बाद सेना में शामिल हो गए और उन्होंने युद्ध अभियानों में हिस्सा लिया। उन्होंने युद्ध समाप्त होने के बाद 1966 की शुरुआत में फिर से इस्तीफा दे दिया।

उनका राजनीतिक करियर जनवरी 1980 में शुरु हुआ जब उन्हें सांसद नियुक्त किया गया लेकिन उन्होंने वर्ष 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार' के दौरान स्वर्ण मंदिर में सेना के घुसने के विरोध में कांग्रेस और लोकसभा से इस्तीफा दे दिया। अमरिंदर अगस्त 1985 में अकाली दल में शामिल हुए। इसके बाद उन्हें 1995 के चुनावों में अकाली दल (लोंगोवाल) की टिकट से पंजाब विधानसभा में चुना गया। वह सुरजीत सिंह बरनाला की सरकार में कृषि मंत्री रहे।

अमरिंदर ने पांच मई 1986 में स्वर्ण मंदिर में अर्द्धसैन्य बलों के प्रवेश के खिलाफ कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद उन्होंने पंथिक अकाली दल का गठन किया जिसका बाद में 1997 में कांग्रेस में विलय हो गया। अमरिंदर ने 1998 में पटियाला से कांग्रेस के टिकट पर संसदीय चुनाव लड़ा लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। उन्होंने कांग्रेस की पंजाब इकाई के प्रमुख के रुप में 1999 से 2002 के बीच सेवाएं दीं।

व्यक्तिगत जीवन

सिंह महाराजा यादवेंद्र सिंह और पटियाला की महारानी मोहिन्दर कौर का बेटा है जो सिद्धू ब्रार वंश के फुलकी वंश से संबंधित है। उन्होंने दून स्कूल, देहरादून जाने से पहले वेलहम बॉयज़ स्कूल और लॉरेंस स्कूल सानवार में भाग लिया। उनके पास एक बेटा, रानींदर सिंह और एक बेटी जय इंदर कौर है, जो दिल्ली के कारोबारी गुरपाल सिंह से शादी कर रहे हैं। उनकी पत्नी, प्रनीत कौर, एक सांसद के रूप में सेवा की और 200 9 से 2014 तक विदेश मंत्रालय में राज्य मंत्री रहे।

उनकी बड़ी बहन हेमेंदर कौर का विवाह पूर्व विदेश मंत्री के नतुवर सिंह से हुआ है। वह शिरोमणि अकाली दल (ए) के प्रमुख और पूर्व आईपीएस अधिकारी सिमरनजीत सिंह मान से भी संबंधित हैं। मान की पत्नी और अमरिंदर सिंह की पत्नी प्रनीत कौर बहनें हैं।

सेना के कैरियर

1 9 63 की शुरुआत में इस्तीफा देने से पहले उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और भारतीय सैन्य अकादमी से स्नातक होने के बाद जून 1 9 63 में भारतीय सेना में शामिल हो गए। वह फिर से सेना में शामिल हुए क्योंकि शत्रुता पाकिस्तान के साथ टूट गई और 1 9 65 भारत-पाकिस्तान युद्ध में कैप्टन के रूप में सेवा की। उन्होंने सिख रेजिमेंट में सेवा की।

अखिल भारतीय जाट महा सभा के अध्यक्ष

कैप्टन अमरिंदर सिंह अखिल भारतीय जाट महा सभा के अध्यक्ष हैं। 1 9 80 से जब वह कैप्टन भगवान सिंह थे, तो वह पिछले 30 सालों से जाट महाभारत के साथ अपने संरक्षक के रूप में संबद्ध थे।

किताबें भी लिखीं

कांग्रेस नेता अमरिंदर सिंह ने युद्ध और सिख इतिहास पर किताबें भी लिखी हैं। उन्होंने ए रिज टू फार, लेस्ट वी फॉरगेट, द लास्ट सनसेट: राइज एंड फॉल ऑफ लाहौर दरबार और द सिख इन ब्रिटेन: 150 ईयर्स ऑफ फोटोग्राफ्स लिखी हैं। उनकी हालिया किताबों में ऑनर एंड फिडेलिटी: इंडियाज मिलिट्री कॉन्ट्रीब्यूशन टु द ग्रेट वार 1914-1918 साल 2014 में चंडीगढ़ में रिलीज हुई थी। इसके अलावा द मानसून वार: यंग ऑफिसर्स रेमनिस- 1965 इंडिया पाकिस्तान वार जिसमें उन्होंने अपने युद्ध के अनुभवों को साधा किया है।