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Naveen Patnaik Biography in Hindi
November 8, 2019 • Damodar Singh

नवीन पटनायक का जन्म ओडिशा के कटक नगर में 16 अक्टूबर 1946 को हुआ।उनके पिता ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक तथा माँ ज्ञान पटनायक थे। उनकी शिक्षा दून विद्यालय में हुई और बाद में उन्होंने किरोड़ीमल महाविद्यालय, दिल्ली से कला में स्नातक की शिक्षा पूर्ण की। नवीन पटनायक एक लेखक भी हैं और उन्होंने अपना युवाकाल लगभग रजनीति और ओडिशा से दूर ही व्यतीत किया। वर्ष 1997 में नवीन पटनायक ने उनके पिता का निधन होने के बाद राजनीति में कदम रखा और एक वर्ष बाद ही अपने पिता बीजू पटनायक के नाम पर बीजू जनता दल की स्थापना की। बीजू जनता दल ने उसके बाद विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज की और भाजपा के साथ सरकार बनाई जिसमें वे स्वयं मुख्यमंत्री बने। उन्होंने 'भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई' और 'गरीब समर्थक नीतियां' अपने ही ढ़ंग से आरम्भ किया। उन्होंने नौकरशाही का ठीक से प्रबन्धन कर राज्य के विकास के अपने पिता के सपने को अपने विकास का आधार बनाया। इसी तरह उन्होंने ओडिशा में लोकप्रियता हासिल की और लगातार चार बार पूर्ण जनाधार के साथ मुख्यमंत्री बनने में सफल हुये। नवीन पटनायक का नाम ओडिशा के इतिहास में सबसे लम्बे समय तक मुख्यमंत्री बनने का कीर्तिमान है।वो अभी तक अविवाहित हैं।

नवीन पटनायक मार्च 2000 के बाद से ओडिशा (उड़ीसा) के मुख्यमंत्री रहे हैं। 21 मई 2009 को उन्हें लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए शपथ दिलाई गई। यह उड़ीसा में स्थित एक क्षेत्रीय पार्टी बीजू जनता दल के संस्थापक और अध्यक्ष हैं। 1996 में, अपने पिता बीजू पटनायक के निधन के बाद, यह स्पष्टवादी लेखक भारत लौट आए और राजनीति में शामिल हो गये। वह 2009 में गंजम जिले के हिंजिल निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए थे।
राजनीतिक कैरियर

नवीन पटनायक वर्ष 1996 में अपने पिता की मृत्यु के बाद से राजनीति में शामिल हो गए थे। वर्ष 1996 में नवीन पटनायक को जनता दल के उम्मीदवार के रूप में असम विधानसभा क्षेत्र से उप-चुनाव में 11वीं लोकसभा के लिए चुना गया। जबकि लोकसभा में रहते हुए, नवीन पटनायक स्पात और खान मंत्रालय की सलाहकार समिति और वाणिज्य संबंधी स्थायी समिति के सदस्य भी थे।

वर्ष 1997 में, नवीन पटनायक ने जनता दल के विभाजन और बीजू जनता दल का गठन किया। वर्ष 2000 में, उड़ीसा में भाजपा के साथ गठबंधन करके विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की। भाजपा की अगुवाई वाली एनडीए सरकार में खान मंत्री के रूप में कार्य कर रहे नवीन पटनायक ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया और उड़ीसा के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

पटनायक ने 2004 में मुख्यमंत्री के रूप में भाजपा के साथ गठबंधन में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद, पुनः मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। हालांकि, 2007 में कंधमाल जिले में हुई सांप्रदायिक हिंसा में भारतीय जनता पार्टी के साथ उनके रिश्ते में खटास आ गई थी।

वर्ष 2009 में, बीजेडी एनडीए के गठबंधन से बाहर चली गयी और राज्य विधानसभा चुनाव से पहले वामपंथी दलों के साथ गठबंधन किया। बीजेडी ने दोनों लोकसभा के साथ-साथ विधानसभा चुनावों में भी जीत हासिल की। बीजेडी ने 21 लोकसभा सीटों में से 14 और 147 विधानसभा सीटों में से 103 सीटों पर जीत हासिल की।

नवीन पटनायक को 21 मई 2009 में लगातार तीसरी बार ओडिशा (उड़ीसा) के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई थी।

नवीन पटनायक ने 2014 में लोकसभा और उड़ीसा (ओडिशा) विधानसभा चुनावों में फिर से एक बड़ी जीत हासिल की। नवीन पटनायक की पार्टी ने 147 उड़ीसा (ओडिशा) विधानसभा सीटों में से 117 और राज्य की 21 लोकसभा सीटों में से 20 सीटों पर जीत हासिल की थी। नवीन पटनायक एक स्पष्ट राजनीतिज्ञ और अपने राज्य के लोगों के बीच एक लोकप्रिय नेता के रूप में जाने जाते हैं।

लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री

नवीन पटनायक अपने पिता बीजू पटनायक का रिकॉर्ड तोड़ने के साथ साथ खुद को डॉ. हरेकृष्ण महताब और जे.बी. पटनायक जैसे राज्य के अन्य नेताओं से आगे खड़ा कर दिया। 5 मार्च, 2000 से लगातार नवीन ओडिशा के मुख्यमंत्री पद पर हैं। डॉ. मेहताब और जेबी पटनायक ने राज्य में इस पद पर तीन-तीन बार अपनी सेवाएं दीं। विश्वनाथ दास, महाराज कृष्णचंद्र गजपति नारायण देव, नवकृष्ण चौधरी, बीजू पटनायक, नंदिनी सत्पथी और हेमानंद बिस्वाल ने दो-दो बार राज्य की बागडोर संभाली। महाराज राजेंद्र नारायण सिंहदेव, बीरेन मित्रा, सदाशिव त्रिपाठी, बिनायक आचार्य, नीलमणि राउत्रे और गिरधर गमांग को मुख्यमंत्री बनने का अवसर एक-एक बार ही मिला। वर्ष 1937 से कम से कम 15 नेता ओडिशा का नेतृत्व करने के लिए 27 मौकों पर शपथ ले चुके हैं। कृष्ण चंद्र गजपति और विश्वनाथ दास ने 1937 से 1944 तक प्रधानमंत्री के तौर पर राज्य का कार्यभार संभाला और 13 अन्य ने मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। फिलहाल असम के राज्यपाल जे.बी. पटनायक ने क़रीब 12 साल तक राज्य के मुख्यमंत्री पद का दायित्व संभाला। कांग्रेस के इस वरिष्ठ नेता का कार्यकाल बाधित भी हुआ। पहली बार 1980 में उन्होंने केवल एक साल पूरा किया। वर्ष 1985 और 1995 में भी उनका कार्यकाल बाधित हुआ।

विवाद

पटनायक की पार्टी बीजेडी के कुछ सांसद विधायकों पर चिट फंड घोटाले में शामिल होने का आरोप है और सीबीआई द्वारा 2014 में पूछताछ की गई है। सीबीआई इस बहु-करोड़ वित्तीय घोटालों के संबंध में 30 से अधिक कंपनियों की जांच कर रही है, जिन्होंने लाखों राज्यों के गरीबों को लूट लिया है। उनके जीवनकाल बचत इस मुद्दे पर पटनायक की चुप्पी की वजह से सवाल उठाए गए थे और इस तरह के कई ऐसे व्यवसायों की निकटता के रूप में, जैसे कि एक ऐसी कंपनी द्वारा एक समाचार चैनल के शुभारंभ के दौरान फोटो खींची गई थी।