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CAA-NRC के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों पर बोलीं एक्ट्रेस पूजा भट्ट- अब आवाज उठाने का वक्त आ गया
January 28, 2020 • Damodar Singh • मनोरंजन

मुंबई: 

अभिनेत्री पूजा भट्ट ने सोमवार को कहा कि मतभेद देशभक्ति का सर्वश्रेष्ठ स्वरूप है. उन्होंने जोर दिया कि सीएए-एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों से हमें यह संदेश मिलता है कि अब आवाज उठाने का वक्त आ गया है. दक्षिण मुंबई के कोलाबा में सीएए-एनआरसी के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में आयोजित एक कार्यक्रम में कई अन्य हस्तियों के साथ भट्ट ने हिस्सा लिया था. कार्यक्रम का आयोजन परचम फाउंडेशन और वी द पीपल ऑफ महाराष्ट्र द्वारा किया गया था. 

कार्यक्रम के वक्ताओं ने बाद में सरकार के प्रतिनिधियों को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें 30 दिनों के भीतर सीएए-एनआरसी-एनपीआर पर राज्य अधिकारियों का रुख जानने की मांग की गई. भट्ट ने कहा "हमारी चुप्पी हमें नहीं बचाएगी और न ही सरकार की. सत्ता पक्ष ने वास्तव में हमें एकजुट किया है." उन्होंने कहा, "छात्र (सीएए-एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं) हमें संदेश दे रहे हैं कि यह आवाज उठाने का समय है. मतभेद देशभक्ति का सबसे बड़ा रूप है." 

वहीं, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ यूरोपीय संसद में प्रस्ताव पेश किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए ईयू विधायी निकाय के प्रमुख से सोमवार को कहा कि किसी विधायिका द्वारा किसी अन्य विधायिका को लेकर फैसला सुनाना अनुचित है और इस परिपाटी का निहित स्वार्थ वाले लोग दुरुपयोग कर सकते हैं. सीएए के खिलाफ यूरोपीय संसद में प्रस्तावित चर्चा और मतदान की पृष्ठभूमि में उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने भी कहा कि भारत के आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है.

इस मामले को लेकर भाजपा ने ईयू संसद के सदस्यों की निष्पक्षता पर सवाल उठाया जबकि कांग्रेस ने भगवा दल पर नागरिकता मामले का अंतरराष्ट्रीयकरण करने का आरोप लगाया. इस बीच, यूरोपीय संघ (ईयू) के संस्थापक सदस्य देशों में शामिल फ्रांस का मानना है कि नया नागरिकता कानून (सीएए) भारत का एक आतंरिक राजनीतिक विषय है. फ्रांसीसी राजनयिक सूत्रों ने सोमवार को यह कहा.

751 सदस्यीय यूरोपीय संसद में करीब 600 सांसदों ने सीएए के खिलाफ छह प्रस्ताव पेश किए हैं जिनमें कहा गया है कि इस कानून का क्रियान्वयन भारतीय नागरिकता प्रणाली में खतरनाक बदलाव को प्रदर्शित करता है.

बिरला ने ईयू यूरोपीय संसद के अध्यक्ष डेविड मारिया सासोली को सोमवार को पत्र लिखा, ‘मैं यह बात समझता हूं कि भारतीय नागरिकता (संशोधन) कानून, 2019 को लेकर यूरोपीय संसद में ‘ज्वाइंट मोशन फॉर रेजोल्यूशन' पेश किया गया है. इस कानून में हमारे निकट पड़ोसी देशों में धार्मिक अत्याचार का शिकार हुए लोगों को आसानी से नागरिकता देने का प्रावधान है.' बिरला ने कहा कि इसका लक्ष्य किसी से नागरिकता छीनना नहीं है और इसे भारतीय संसद के दोनों सदनों में आवश्यक विचार-विमर्श के बाद पारित किया गया है. इससे पहले नायडू ने कहा कि वह ऐसे मामलों में विदेशी निकायों के हस्तक्षेप की प्रवृत्ति से चिंतित हैं जो पूरी तरह भारतीय संसद और सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं.

उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रयास पूरी तरह अवांछनीय हैं और उम्मीद है कि भविष्य में इस तरह के बयानों से बचा जाएगा. नायडू ने कहा कि भारत के आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है. यूरोपीय संसद में सीएए के खिलाफ प्रस्तावों पर विदेश मंत्रालय से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

टिप्पणियां

हालांकि, आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि सीएए भारत का पूरी तरह से एक आंतरिक विषय है और इस कानून को संसद के दोनों सदनों में चर्चा के बाद लोकतांत्रिक तरीके से अंगीकार किया गया है.