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जब घंटों साइकिल की चेन टूटने का बहाना बना लड़की का घर के बाहर इंतजार करते थे 'जगजीत'
February 8, 2020 • Damodar Singh • मनोरंजन

नई दिल्‍ली। 'चिटठी न कोई संदेश, जाने वो कौन सा देस जहां तुम चले गए'। ये उस गीत की पंक्तियां हैं जिसको मशहूर गायक जगजीत सिंह ने आवाज दी थी। यूं तो ये गीत उनके बेटे की आकस्मिक मौत के काफी समय बाद उन्‍होंने गाया था। इस गीत के जरिये उनका वो दर्द भी सामने आया था जो उन्‍हें अपने बेटे को खोने से मिला था। ले‍किन, अब जबकि खुद जगजीत इस दुनिया से विदा ले चुके हैं तो उनके चाहने वालों के लिए ये पक्तियां उन्‍हें एक श्रद्धांजलि की तरह ही हैं। 

जगजीत सिंह को यूं ही गजल सम्राट नहीं कहा जाता है। ये उपाधि उन्‍हें इस वजह से मिली थी कि क्‍योंकि उनकी ही बदौलत गजल आम आदमी तक पहुंच सकी। उससे पहले गजल उर्दू जानने वालों तक ही सीमित थी। उन्‍होंने गजलों को उस अंदाज में पेश किया जो सुनने वालों के दिलों तक उतरती चली गई। गजलों और उनके संगीत को लेकर भी जगजीत सिंह ने कई तरह के प्रयोग किए। गजलों में इंडियन और वेस्‍टर्न म्‍यूजिक की मौजूदगी के साथ उनकी महकती आवाज ने कई गीतों और गजलों को भी अमर कर दिया। 

उन्‍होंने गुजरे दौर के शायरों से लेकर नए जमाने के शायरों की भी गजलों और गीतों को अपनी आवाज दी। बात चाहे गालिब की हो या मीर की या हो फिराक गोरखपुरी का कलाम या फिर फैज और निदा फाजली की लिखी गजलें, उनके होठों पर आते ही उनमें चार चांद लग जाते थे। यही वजह थी कि वर्ष 2003 में भारत सरकार ने कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्‍मानित किया था। वर्ष 2014 में उनके सम्‍मान में दो डाक टिकट भी जारी किए गए थे। 

लोग अक्‍सर उनके लाइव शो के लिए महीनों तक इंतजार करते थे और उनके शो के टिकट भी हाथोंहाथ बिक जाते थे। इस तरह के लाइव शो में कई बार उन्‍होंने अपने जीवन के वो किस्‍से भी सुनाए जिन्‍हें सुन लोग अपनी हंसी रोक नहीं पाए। ऐसे ही एक शो में उन्‍होंने अपने पहले प्‍यार का भी जिक्र किया था जो परवान नहीं चढ़ सका था। वो एक लड़की के प्‍यार में इस कदर पागल हो गए थे कि अक्‍सर उसके घर के बाहर साइकिल की चैन टूटने या पहिये की हवा निकलने का बहाना बनाकर खड़े हो जाते थे। ये सिलसिला काफी आगे तक बढ़ा और साइकिल से जगजीत मोटरसाइकिल पर आ गए। लेकिन नतीजा सिफर ही निकला। जगजीत की पढ़ाई में दिलचस्‍पी कुछ कम ही थी। यही वजह थी कि वह एग्‍जाम में कई बार फेल भी हुए। जैसे-तैसे कॉलेज की पढ़ाई के लिए जालंधन के डीएवी कॉलेज में एडमिशन मिला तो यहां पर भी उनका ज्‍यादातर समय गर्ल्‍स कॉलेज के इर्दगिर्द की कटता था। इसके अलावा उन्‍हें फिल्‍म देखना भी काफी पसंद था। इसके लिए अपनी जेब खर्च के पैसों का इस्‍तेमाल करते थे और कई बार ब्‍लैक में टिकट लेने की वजह से ये खत्‍म भी हो जाते थे। बहरहाल, ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्‍होंने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से हिस्‍ट्री में पोस्‍ट ग्रेजुएशन किया।