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कमलनाथ सरकार पर संकट कायम, भाजपा का दावा 15-20 कांग्रेस विधायक संपर्क में
March 5, 2020 • Damodar Singh • देश

भोपाल, । सवा साल पहले बनी मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार पर मंडराया संकट कायम है। हालांकि कांग्रेस ने दावा किया कि मध्य प्रदेश सरकार को अब कोई खतरा नहीं है, उसके विधायक लौट आए हैं, लेकिन भाजपा का दावा है कि कांग्रेस के 15 से 20 विधायक उसके संपर्क में हैं। वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा है कि मप्र सरकार को कोई संकट नहीं है। वहीं भाजपा नेता और पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा का कहना है कहा कि कांग्रेस विधायक काम नहीं करवा पा रहे हैं, इसलिए उनमें असंतोष व्याप्त है।

अब तेज होगा सियासी संग्राम

भोपाल से लेकर दिल्ली तक मंगलवार रात से शुरू हुआ मध्य प्रदेश का सियासी संग्राम अगले एक-दो दिन में और भी तेज होने के आसार हैं। भाजपा का कहना है कि असली खेल तो अब शुरू होगा। दरअसल मंगलवार रात कमलनाथ सरकार की कुर्सी को हिलाने वाले सियासी भूकंप का केंद्र दिल्ली और हरियाणा में रहा। भाजपा और कांग्रेस के बीच रातभर विधायकों की खींचतान का ड्रामा चला। हॉर्स ट्रेडिंग को लेकर चल रहे घटनाक्रम के बीच बुधवार को चार बागी विधायकों को विशेष विमान से दिल्ली से भोपाल लेकर आ गए। चार अब भी लापता बताए गए हैं।

एदल सिंह कंषाना (कांग्रेस) राजेश शुक्ला (सपा), संजीव सिंह कुशवाह (बसपा) और रामबाई (बसपा) इन विधायकों को विशेष विमान से बेहद ही गोपनीय ढंग से स्टेट हैंगर से बाहर निकाला गया और सीधे मुख्यमंत्री निवास ले जाया गया, जहां उनकी मुख्यमंत्री के साथ लंबी बैठक चली।

ये विधायक हैं लापता
बताया जाता है कि चार लापता विधायकों में बिसाहूलाल सिंह (कांग्रेस), हरदीप सिंह डंग (कांग्रेस), रघुराज सिंह कंसाना (कांग्रेस) और सुरेंद्र सिंह शेरा (निर्दलीय) शामिल हैं।

बुधवार को भी भाजपा की सियासत का केंद्र दिल्ली में ही सिमटा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सुबह ही केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के बंगले पहुंचे और दोनों के बीच एक घंटे की चर्चा हुई। यहां से निकलते ही चौहान ने सारे सियासी मामले से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की। उन्हें सारे सियासी घटनाक्रम से अवगत कराया।

राज्यसभा चुनाव की सियासत

मप्र के सियासी बवाल को लेकर यह भी कहा जा रहा है कि यह सरकार गिराने-बनाने की बजाय राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए भी हो सकता है। मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होने हैं। वर्तमान में इन तीन सीटों से दिग्विजय सिंह (कांग्रेस), सत्यनारायण जटिया और प्रभात झा (दोनों बीजेपी) राज्यसभा सदस्य हैं। दिग्विजय सिंह लोकसभा चुनाव हार गए थे, ऐसे में वह फिर से राज्यसभा जाना चाहते हैं। सियासी गलियारों में यह भी चर्चा है कि राज्यसभा सीट सुरक्षित करने के लिहाज से ही दिग्विजय सिंह ने सारा ताना-बाना बुना है।

वहीं गुना लोकसभा सीट से चुनाव हारने के बाद कांग्रेस पार्टी ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी राज्यसभा का उम्मीदवार बनाए जाने के कयास लगाए जास रहे हैं। विस के संख्या बल के हिसाब से देखें तो भाजपा तीसरी सीट जीतने की स्थिति में नहीं है, इसलिए भाजपा क्रॉस वोटिंग के भरोसे है। वहीं कांग्रेस ने अपने विधायकों को कार्रवाई की चेतावनी दे दी है। 

भाजपा माफियाओं के साथ मिलकर प्रदेश में कांग्रेस सरकार को अस्थिर करने की लगातार असफल कोशिश कर रही है। कांग्रेस सरकार के पास पूरा बहुमत है। हर बार भाजपा को मुंह की खानी पड़ी है। इस बार भी भाजपा के मंसूबे मुंगेरीलाल के सपने साबित होंगे।मप्र में कांग्रेस सरकार को अब कोई खतरा नहीं है। राज्यसभा चुनाव की तीसरी सीट भी कांग्रेस जीतेगी।

दिग्विजय सिंह, वरिष्ठ कांग्रेस नेता
कांग्रेस के विधायक भी नाराज हैं। आपस में कई गुट है, जो एक-दूसरे को निपटाने में लगे हैं। उनकी आपस की लड़ाई वो जाने, भाजपा को कोई लेना-देना नहीं है। 

मप्र के राजनीतिक घटनाक्रम पर भाजपा का कि सी प्रकार लेना-देना नहीं है। दिग्विजय सिंह कमलनाथ को ब्लैकमेल कर रहे हैं। कांग्रेस अपना घर और विधायकों को संभाले।
शिवराज के काफिले पर पत्थर फेंके , काले झंडे भी दिखाए

विधायकों की खरीद-फरोख्त की खबरों के बीच बुधवार को कुछ समय के लिए मप्र के आगर मालवा पहुंचे पूर्व सीएम शिवराजसिंह चौहान, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा एवं नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव के काफिले पर अज्ञात लोगों ने पत्थर फेंके। वहीं, कांग्रेसियों ने काले झंडे दिखाए। शिवराज ने कार्यक्रम में कांग्रेस पर पत्थर फेंकने का आरोप लगाया।

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश विधानसभा में 230 सीटें हैं, जिनमें से वर्तमान में दो खाली हैं। इस प्रकार वर्तमान में प्रदेश में कुल 228 विधायक हैं, जिनमें से 114 कांग्रेस, 107 भाजपा, चार निर्दलीय, दो बहुजन समाज पार्टी और एक समाजवादी पार्टी का विधायक है। कांग्रेस सरकार को इन चारों निर्दलीय विधायकों के साथ-साथ बीएसपी और एसपी का भी समर्थन है।