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सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के मुद्दे पर चर्चा नहीं करेगा सुप्रीम कोर्ट
February 4, 2020 • Damodar Singh • देश

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने स्पष्ट किया है कि वह केरल के सबरीमला मंदिर (Sabarimala Temple) में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश के मामले पर चर्चा नहीं कर रहा. कोर्ट ने विभिन्न धर्मों में महिलाओं के खिलाफ भेदभाव के मामले से निपटने के संबंध में चर्चा के मुद्दों को तय करने की प्रक्रिया सोमवार को शुरू की और स्पष्ट यह बात स्पष्ट की. जस्टिस एस ए बोबडे की अध्यक्षता में 9 न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि वह मामले में तय किए गए कानूनी प्रश्नों और समय सीमा के बारे में पक्षों को 6 फरवरी को सूचना देगी.



पीठ इस मुद्दे पर भी गौर करेगी कि क्या पुनर्विचार के लिए विषय को बड़ी पीठ को सौंपा जा सकता है. इस पीठ में न्यायमूर्ति आर भानुमति, न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव, न्यायमूर्ति एम एम शांतनागौडर, न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी, न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति सूर्य कांत शामिल हैं.

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता फाली एस नरीमन, कपिल सिब्बल, श्याम दीवान और राकेश द्विवेदी ने कहा कि पुनर्विचार के अधिकार क्षेत्र के दायरे में आने वाले मुद्दों को वृहद पीठ को नहीं भेजा जा सकता. वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि पुनर्विचार के मामले में, संभावनाएं बहुत सीमित होती हैं और अदालत बस इतना देख सकती है कि समीक्षा के तहत फैसले में कोई स्पष्ट गलती है या नहीं.

सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता, वरिष्ठ अधिवक्ता के परासनर और रंजीत कुमार ने हालांकि दलील का विरोध किया और कहा कि सर्वोच्च अदालत मामले पर फैसले के दौरान उठे व्यापक मुद्दे को पुनर्विचार के लिये बड़ी पीठ को संदर्भित कर सकती है.

पीठ ने कहा कि वह सभी मुद्दों को देखेगी और उन सवालों को तय करेगी जिसका निर्णय नौ न्यायाधीशों की पीठ को करना है.