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Yogi Adityanath Biography in Hindi
November 8, 2019 • Damodar Singh

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

इनका जन्म 5 जून 1972 को उत्तराखंड के गढ़वाली राजपूत परिवार में आनंद सिंह बिष्ट के घर में अजय सिंह बिष्ट के रूप में हुआ था। इनके पिता एक फारेस्ट रेंजर थे। इन्होंने उत्तराखंड में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से गणित में स्नातक की उपाधि प्राप्त की।

वर्ष 1990 में, इन्होने अयोध्या राम मंदिर के आंदोलन में भाग लिया। योगी आदित्यनाथ गोरखनाथ मठ के प्रमुख पुजारी महंत अवैद्यनाथ के शिष्य बने। इसके बाद, इन्होंने 'योगी आदित्यनाथ' का नाम प्राप्त किया और महंत अवैद्यनाथ के उत्तराधिकारी भी बने।

राजनीतिक यात्रा

इनको वर्ष 1994 में गोरखनाथ मठ के प्रमुख पुजारी के रूप में चुना गया था, और 4 साल बाद ये भारतीय संसद के निचले सदन के लिए चुने गए। ये 12वीं लोकसभा में सबसे कम उम्र के सदस्य थे। पांच वर्षों तक लगातार, योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से संसद के लिए चुने गए।

इन्होने हिंदू युवा वाहिनी, जो एक यूथ विंग है, जिसे पूर्वी उत्तर प्रदेश में हिंसक गतिविधियों के लिए जाना जाता है, की शुरुआत की।


योगी आदित्यनाथ का लोकसभा चुनावों में प्रदर्शन
योगी आदित्यनाथ का लोकसभा चुनावों और नीतियों में प्रदर्शन व् सहयोग| योगी आदित्यनाथ सबसे पहले सन् 1998 में गोरखपुर से चुनाव भाजपा प्रत्याशी के तौर पर लड़े और तब उन्होंने बहुत ही कम अंतर से जीत दर्ज की।

लेकिन उसके बाद हर चुनाव में उनका जीत का अंतर बढ़ता गया और वे 1999, 2004, 2009 तथा 2014 में सांसद चुने गए। इन्होंने अप्रैल 2002 में हिन्दू युवा वाहिनी बनायी।

योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री है और लोगों की पहली पसंद बन चुके है| योगी आदित्यनाथ जी ने उत्तर प्रदेश का हाल पहले से काफी अच्छा कर दिया है.

योगी आदित्यनाथ के विवाद – योगी आदित्यनाथ का जीवन परिचय
योगी आदित्यनाथ एक हिन्दू महंत है जो की कुछ विवाद में भी आ चुके हैं जिसके चलते सन् 2008 में 07 सितम्बर को आजमगढ़ में जानलेवा हिंसक हमला हुआ था| जिस हमले में योगी जी बाल बाल बचे.

इस हमले में 100 से भी ज्यादा वाहनों को हमलावरों ने घेर लिया था और बेचारे निहत्थे लोगों को लहुलुहान भी किया| आदित्यनाथ को गोरखपुर दंगों के दौरान गिरफ्तार किया गया जब मुस्लिम त्यौहार मोहर्रम के दौरान फायरिंग मे एक हिन्दू युवा की जान चली गयी.

जिलाधिकारी ने बताया कि वह बुरी तरह जख्मी है। तब अधिकारियों ने योगी को उस जगह जाने से मना कर दिया परन्तु योगी आदित्यनाथ उस जगह पर जाने को अड़ गए.

तब उन्होंने शहर में लगे कर्फ्यू को हटाने की मांग की। अगले दिन उन्होंने शहर के मध्य श्रद्धांजलि सभा का आयोजन करने की घोषणा की लेकिन जिलाधिकारी ने इसकी अनुमति देने से साफ मना कर दिया.

योगी आदित्यनाथ ने भी इसकी चिंता नहीं की और हजारों समर्थकों के साथ अपनी गिरफ़्तारी करवा दी। आदित्यनाथ को सीआरपीसी (CRPC) की धारा (Act) 151A, 146, 147, 279, 506 के तहत जेल भेज दिया गया.

उनपर कार्यवाही का असर हुआ कि मुंबई-गोरखपुर गोदान एक्सप्रेस के कुछ डिब्बे फूंक दिए गए, जिसका आरोप उनके संगठन हिन्दू युवा वाहिनी पर लगा दिया.

ये दंगे पूर्वी उत्तर प्रदेश के 6 जिलों और तीन माडलों में भी फैला गया था| योगी आदित्यनाथ की गिरफ़्तारी के अगले दिन जिलाधिकारी हरिओम और पुलिस प्रमुख राजा श्रीवास्तव का तबादला हो गया था.

माना तो ये जा रहा था की योगी आदित्यनाथ के दबाव के कारण मुलायम सिंह यादव की उत्तर प्रदेश सरकार को यह कार्यवाही करनी पड़ी|

योगी आदित्यनाथ धर्मंतार्ण के खिलाफ थे ऐसे तो योगी आदित्नाथ जी सन्यासी थे और अपने घर वापस जाने के लिए काफी चर्चित रहे.

सन् 2005 में योगी आदित्यनाथ ने कथित तौर पर 1800 ईसाईयों का शुद्धीकरण कर हिन्दू धर्म में शामिल कराया| ईसाईयों के इस शुद्धीकरण का कम उत्तर प्रदेश के एटा जिले में किया गया.

भाजपा के साथ संबंध

शुरुआत में, योगी आदित्यनाथ के भाजपा के साथ संबंध सहज नहीं थे। हालांकि, धीरे-धीरे सब कुछ सामान्य हो गया और कई भाजपा नेताओं द्वारा गोरखपुर का दौरा किया गया। योगी आदित्यनाथ मार्च 2010 में उन भाजपा सांसदों में से एक थे, जिन्होंने संसद में महिला आरक्षण विधेयक पर पार्टी को चुनौती दी थी।

योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के 2017 विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी के एक प्रमुख प्रचारक थे। मार्च 2017 में, भाजपा से विधानसभा चुनाव जीतने के बाद, योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। सत्ता में आने के बाद, योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में गाय की तस्करी और सरकारी कार्यालयों में तम्बाकू, पान और गुटका पर प्रतिबंध लगा दिया और राज्य में एंटी-रोमियो दल का भी गठन किया। इसके अलावा उत्तर प्रदेश पुलिस ने भी 100 से अधिक पुलिसकर्मियों को निलंबित किया।

मुख्यमंत्री का पद संभालने के साथ-साथ योगी आदित्यनाथ खुद लगभग 36 मंत्रालयों की देख-रेख कर रहे हैं, जिनमें से गृह, आवास, राजस्व, खाद्य और नागरिक आपूर्ति, खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन, टिकट और रजिस्ट्री, शहर और देश नियोजन विभाग, अर्थशास्त्र और सांख्यिकी, भूतत्व एवं खनिकर्म, बाढ़ नियंत्रण, सतर्कता, जेल, सामान्य प्रशासन, सचिवालय प्रशासन, कार्मिक और नियुक्ति, सूचना, संस्थागत वित्त, नियोजन, नगर भूमि, राज्य संपत्ति, यूपी राज्य पुनर्गठन समिति, प्रशासन सुधार, कार्यक्रम क्रियान्वयन, सहायता और पुनर्वास, राष्ट्रीय एकीकरण, किराया नियंत्रण, बुनियादी ढांचा, समन्वय, भाषा, बाहरी सहायता प्राप्त परियोजना, लोक सेवा प्रबंधन, उपभोक्ता संरक्षण, वजन और माप विभाग शामिल हैं।